नात लिरिक्स

Dekhne Ko Ya Muhammad Yun To Kya Dekha Nahin | Koi Aap Sa Dekha Nahin

देखने को या मुहम्मद यूँ तो क्या देखा नहीं | कोई आप सा देखा नहीं

नात ख़्वान: नुसरत फ़तेह अली ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदा का नूर तुझ में हू-ब-हू हैख़ुदा पिन्हा मगर तू रू-ब-रू हैतेरी 'अज़मत का अंदाज़ा हो किस कोख़ुदा है और ख़ुदा के बा'द तू है

कोई आप सा देखा नहीं, कोई आप सा देखा नहीं

देखने को, या मुहम्मद ! यूँ तो क्या देखा नहींहाँ ! मगर महबूब कोई आप सा देखा नहीं

देखने को, या मुहम्मद ! यूँ तो क्या देखा नहीं

इक से इक बढ़ कर हसीं देखे मगर, या मुस्तफ़ा !तुम से बढ़ कर हुस्न वाला दूसरा देखा नहीं

देखने को, या मुहम्मद ! यूँ तो क्या देखा नहीं

कोई आप सा देखा नहीं, कोई आप सा देखा नहीं

यूँ तो सारे नबी मोहतरम हैं मगर

कोई आप सा देखा नहीं, कोई आप सा देखा नहीं

रसूल और भी आए जहान में लेकिन

कोई आप सा देखा नहीं

मीम का पर्दा हटा कर वो निगाह-ए-शौक़ सेमुस्तफ़ा को देख ले जिस ने ख़ुदा देखा नहीं

कोई आप सा देखा नहीं, कोई आप सा देखा नहीं

सूरत को तेरी देख के कुछ मुँह से न निकलानिकला तो ये निकला

कोई आप सा देखा नहीं, कोई आप सा देखा नहीं

मैं तो कर सकता नहीं जन्नत की बातें शौक़ सेवो करे जिस ने दयार-ए-मुस्तफ़ा देखा नहीं

देखने को, या मुहम्मद ! यूँ तो क्या देखा नहीं

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