ना ये बात शान से है, ना ये बात माल-ओ-ज़र कीवही जाता है मदीने आक़ा जिसे बुलाएं
मुस्तफ़ा नज़रे-करम फरमाएंगेएक दिन हम भी मदीने जाएंगे
साक़ी-ए-कौसर करम फरमाएंगेहम पियेंगे, वो पिलाते जाएंगे
एक दिन हम भी मदीने जाएंगे
मुस्तफ़ा नज़रे-करम फरमाएंगेएक दिन हम भी मदीने जाएंगे
शब्बरो-शब्बीर जान-ए-फ़ातिमाअपने नाना से हमें मिलवाएंगे
एक दिन हम भी मदीने जाएंगे
मुस्तफ़ा नज़रे-करम फरमाएंगेएक दिन हम भी मदीने जाएंगे
सब्ज़-गुम्बद पर नज़र जब जाएगीकाम सब बिगड़े हुवे बन जाएंगे
एक दिन हम भी मदीने जाएंगे
मुस्तफ़ा नज़रे-करम फरमाएंगेएक दिन हम भी मदीने जाएंगे
सोऊंगा मैं आज फिर इस आस परख़्वाब में जल्वा दिखाने आएँगे
एक दिन हम भी मदीने जाएंगे
मुस्तफ़ा नज़रे-करम फरमाएंगेएक दिन हम भी मदीने जाएंगे
जाग उठेगी मेरी क़िस्मत अलीजब क़दम उन के मेरे घर आएंगे
एक दिन हम भी मदीने जाएंगे
मुस्तफ़ा नज़रे-करम फरमाएंगेएक दिन हम भी मदीने जाएंगे
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