नात लिरिक्स

Mujh Ko Ye Keh Ke Satate Hain Zamane Wale

मुझ को ये कह के सताते हैं ज़माने वाले

नात ख़्वान: अंबर मुशाहिदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुझ को ये कह के सताते हैं ज़माने वालेकब बुलाएँगे तुझे सब को बुलाने वाले

रास्ता रोक न पाएँगे ज़माने वालेजब मदीने में बुलाएँगे बुलाने वाले

जब चलूँ शहर-ए-मदीना से तो सरकार कहेंलौट आ जा, ओ मेरे शहर से जाने वाले

मुझ को इस बात का हर रात यक़ीं रहता हैआप हैं आज मेरे ख़्वाब में आने वाले

आप को देख के महशर में कहेंगे 'आसीआ गए हम को जहन्नम से बचाने वाले

काश ! महशर में ये कह कह के बुलाएँ आक़ाआ इधर आ मेरे ना'लैन उठाने वाले

दीन की राह में घर-बार लुटा देते हैंऐसे होते हैं मुहम्मद के घराने वाले

अब कोई ख़ौफ़ नहीं मुझ को, ज़माने वालो !मेरे ख़्वाजा हैं मेरी लाज बचाने वाले

हश्र तक फूले-फले मस्लक-ए-आ'ला-हज़रतमिट गए ख़ुद ही ज़माने से मिटाने वाले

उन से कह दो कि वो आईने में चेहरा देखेंअपने जैसा मेरे आक़ा को बताने वाले

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