नात लिरिक्स

Mubarak Raat Aai Hai Chalo Rab Ko Manate Hain

मुबारक रात आई है चलो रब को मनाते हैं

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुबारक रात आई है, चलो रब को मनाते हैंख़ुदा की वुस'अत-ए-रहमत से अब हम लौ लगाते हैं

लो दो 'अश्रे भी गुज़रे अब फ़क़त बाक़ी है इक 'अश्राइसी 'अश्रे में दोज़ख़ से ख़ुलासी का मिले तोहफ़ाबहुत नूरानी-ओ-ताबिंदा हैं रहमत भरी रातेंनवाफ़िल और तिलावत से चलो फिर हम सजाते हैं

मुबारक रात आई है, चलो रब को मनाते हैंख़ुदा की वुस'अत-ए-रहमत से अब हम लौ लगाते हैं

हुई है सूरा इक नाज़िल इसी शब की फ़ज़ीलत मेंकलामुल्लाह भी है शामिल इसी शब की फ़ज़ीलत मेंतक़द्दुस में ये इक शब है हज़ारों माह से अफ़ज़लचलो अब मो'तकिफ़ बन कर दिलों को जगमगाते हैं

मुबारक रात आई है, चलो रब को मनाते हैंख़ुदा की वुस'अत-ए-रहमत से अब हम लौ लगाते हैं

यही वो रात है जिस के लिए कोशाँ थे ख़ुद आक़ायही वो रात है जिस में नुज़ूल-ए-ताइर-ए-सिदरायही वो रात है जिस की सहर है इंतिहा रौशनचलो इन ताक़ रातों में मुक़द्दर को जगाते हैं

मुबारक रात आई है, चलो रब को मनाते हैंख़ुदा की वुस'अत-ए-रहमत से अब हम लौ लगाते हैं

गुनाहों और हर इक लग़्ज़िश से कर लें आज हम तौबाख़ताएँ बख़्शवा लें और करें दिल खोल कर सदक़ाऐ लोगो ! हम तिलावत को, नवाफ़िल और फराइज़ कोअदा कर के चलो बाब-ए-इजाबत खटखटाते हैं

मुबारक रात आई है, चलो रब को मनाते हैंख़ुदा की वुस'अत-ए-रहमत से अब हम लौ लगाते हैं

अगर इस शब में, यारो ! तुम उठाओगे दु'आ को हाथतो रखना मुझ को भी अपनी मुनाजातों में हर दम साथहर इक साइल की इस शब में, इलाही ! कर दु'आ मक़बूलचलो अब राह-ए-हक़ में, फ़ाज़ली ! तन मन लुटाते हैं

मुबारक रात आई है, चलो रब को मनाते हैंख़ुदा की वुस'अत-ए-रहमत से अब हम लौ लगाते हैं

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