नात लिरिक्स

Mohe Sapna Ma Darshan Dikhaye Gayo Re More Ghaus-ul-wara

मोहे सपना मा दर्शन दिखाए गयो रे मोरे ग़ौस-उल-वरा

नात ख़्वान: सय्यिद अमीन-उल-क़ादरीशायर: अल्लामा सईद एजाज़ कामटवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहे सपना मा दर्शन दिखाए गयो रेमोरे ग़ौस-उल-वरामोरा सोते में भाग जगाए गयो रेमोरे ग़ौस-उल-वरा

चश्मा बग़दाद का जब लगा आँख परदेखा तयबा नगरजानिब-ए-मक्का जब भी उठी है नज़रदेखा तयबा नगरमोरे मन मा मदीना बसाए गयो रेमोरे ग़ौस-उल-वरा

ग़म का तूफ़ान था, मैं परेशान थामुझ को बख़्शा सुकूँटूटी पतवार थी और मैं हैरान थामुझ को बख़्शा सुकूँमोरी डूबती नय्या तिराए गयो रेमोरे ग़ौस-उल-वरा

ग़म की ज़ुल्मत हटी, रात काली कटीऔर उजाला हुआरास्ते से मुसीबत की ज़ुल्मत छटीऔर उजाला हुआमोरी आशा का दीप जलाए गयो रेमोरे ग़ौस-उल-वरा

लब पे या ग़ौस या ग़ौस या ग़ौस हैहर नफ़स हर क़दमये 'अक़ीदत की आवाज़ बे-लौस हैहर नफ़स हर क़दमअहल-ए-सुन्नत का ना'रा सिखाए गयो रेमोरे ग़ौस-उल-वरा

चाँदनी मुझ को, ए'जाज़ ! फीकी लगेऐसे अच्छे हैं वोऔर किरन मुझ को सूरज की धुँदली लगेऐसे अच्छे हैं वोकैसा नूरी मुखड़वा दिखाए गयो रेमोरे ग़ौस-उल-वरा

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