नात लिरिक्स

Milta Hai Kya Madine Mein Ek Baar Ja Ke Dekh

मिलता है क्या मदीने में इक बार जा के देख

नात ख़्वान: मनसब अली नक़्शबंदीशायर: वासिफ़ अली वासिफ़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मिलता है क्या मदीने में इक बार जा के देखकरते हैं माला-माल वो, दामन बिछा के देख

उन की गली में माँगते फिरते हैं ताजदारतू भी उसी करीम के मँगतों में जा के देख

ख़ैरात दे के कहते हैं, मँगते की ख़ैर होबिन माँगे ख़ैर मिलती है आ आज़मा के देख

'इज़्ज़त मिलेगी इस-क़दर, हो जाएगा ग़नीदस्त-ए-तलब हुज़ूर की जानिब बढ़ा के देख

धुल जाएँगे गुनाह तेरे, हो जाएगा करमतू भी दर-ए-रसूल पे आँसू बहा के देख

तेरे ग़रीब-ख़ाने में वो आएँगे ज़रूरघर पर रसूल-ए-पाक की महफ़िल सजा के देख

वासिफ़ ! तेरी निजात का है रास्ता यहीउल्फ़त नबी की आल की दिल बे बसा के देख

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