नात लिरिक्स

Mil Gaya Rab Ke Karam Se Be-qararon Ko Qarar | Mah-e-Ramzan Aa Gaya Hai Le Ke Rehmat Ki Bahar

मिल गया रब के करम से बे-क़रारों को क़रार | माह-ए-रमज़ाँ आ गया है ले के रहमत की बहार

नात ख़्वान: उमैर ज़ुबैरशायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नूर-ए-रमज़ान ! नूर-ए-रमज़ान ! नूर-ए-रमज़ान !

नूर-ए-रमज़ान ! नूर-ए-रमज़ान !नूर-ए-रमज़ान ! नूर-ए-रमज़ान !

मिल गया रब के करम से बे-क़रारों को क़रारमाह-ए-रमज़ाँ आ गया है ले के रहमत की बहार

मिल गया रब के करम से बे-क़रारों को क़रार

वक़्त हो इफ़्तार का तो क्या बताऊँ, दोस्तो !'अर्श पर जाती है सीधी रोज़ा-दारों की पुकार

मिल गया रब के करम से बे-क़रारों को क़रार

शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !

फिर नवीद-ए-पुर-मसर्रत मिल गई रमज़ान कीमोमिनो पर ख़ुश हुवा है आज फिर परवरदिगार

मिल गया रब के करम से बे-क़रारों को क़रार

शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !

रहमतों वाला है ये वो माह-ए-अक़्दस, मरहबा !साल भर रहता है जिस का मोमिनों को इंतिज़ार

मिल गया रब के करम से बे-क़रारों को क़रार

शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !

ये दु'आ मेरी है, फ़ारूक़ी ! ख़ुदा की ज़ात सेसब की क़िस्मत में हो ये माह-ए-मुबारक बार-बार

मिल गया रब के करम से बे-क़रारों को क़रार

शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !शान-ए-रमज़ान ! जान-ए-रमज़ान !

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