मिल गई ऐसी ज़िया है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप सेदिल मेरा रौशन हुवा है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
मिल गई ऐसी ज़िया है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
जान-ओ-दिल क़ुर्बान कर देना नबी के नाम परहमने तो ये ही पढ़ा है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
मिल गई ऐसी ज़िया है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
कर दिया सब कुछ अता हम को ख़ुदा के फ़ज़्ल सेक्या नहीं हम को मिला है ! ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
मिल गई ऐसी ज़िया है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
आप की चश्म-ए-तवज्जोह ही का ये तो फ़ैज़ हैभर गया दामन मेरा है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
मिल गई ऐसी ज़िया है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
दफ़अ'तन ही सारे आलाम-ओ-मसाइब मिट गएहाल अपना जब कहा है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
मिल गई ऐसी ज़िया है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
मेरा, अकरम ! नाम जो सब की ज़ुबाँ पर आज हैये लक़ब मुझ को मिला है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
मिल गई ऐसी ज़िया है, ग़ौस-ए-आज़म ! आप से
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