नात लिरिक्स

Meri Pyari Bahan Maa Ki Noor-e-Nazar | Apni Sasural Ko Ho Ke Rukhsat Chali

मेरी प्यारी बहन माँ की नूर-ए-नज़र | अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली

शायर: ज़ीशान भरगैनवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरी प्यारी बहन, माँ की नूर-ए-नज़रअपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चलीछोड़ कर अपने बाबुल का प्यारा ये घरअपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली

तेरे भाई की है, बहन ! तुझ को दु'आअपनी ससुराल में ख़ुश रहे तू सदाख़ुशियों के अपने घर में लगाना शजरअपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली

तेरा लड़ना झगड़ना वो याद आएगारूठ जाना मनाना वो याद आएगाढूँडेगी घर में तुझ को मेरी अब नज़रअपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली

जिस तरह तू ने घर को सँभाला, बहन !ऐसे ही देखना अपनी ससुराल कोकोई शिकवा न लाना कभी होंटों परअपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली

अपने शौहर की ख़िदमत तू करना सदाऔर नमाज़ों की पाबंद रहना सदाइस के ज़री'ए ही करना है रौशन क़बरअपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली

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