नात लिरिक्स

Meri Aankhen Tarasti Hain Ya Rab | Mujh Ko Baagh-e-Madina Dikha De

मेरी आँखें तरसती हैं या रब | मुझ को बाग़-ए-मदीना दिखा दे

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ज़ैन-उल-आबिदीन जलालीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शहर-ए-मदीना याद आया है, वो भी इतनी रात-गए'इश्क़-ए-नबी में दिल तड़पा है, वो भी इतनी रात-गए

मेरी आँखें तरसती हैं, या रब !मुझ को बाग़-ए-मदीना दिखा देप्यार से ज़िंदगी देने वाले !मुझ को प्यारे नबी से मिला दे

कर्बला में हुसैन इब्न-ए-हैदरहक़ से फ़रमाया ख़ूँ में नहा करताज-ए-शाही यज़ीदों को दे करमुझ को जाम-ए-शहादत पिला दे

ले के तलवार फ़ारूक़ घर सेक़त्ल करने चले थे नबी कोपास पहुँचे तो की 'अर्ज़ रो करमेरे महबूब ! कलमा पढ़ा दे

तन पे खा खा के ज़ालिम के कोड़ेहँस के बोले बिलाल-ए-हब्शीमैं न छोड़ूँगा दामन नबी काबे-हया चाहे जितनी सज़ा दे

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