मेरे कमली वाले जैसा कोई था, ना है, ना होगाकभी उन सा ख़ूब-ओ-यक्ता कोई था, ना है, ना होगा
वो हबीब हैं ख़ुदा के, वो मुहिब हैं किब्रिया केकिसी तौर उन से बाला कोई था, ना है, ना होगा
वो जो बोरिया-नशीं था, जिसे फ़ख्र फ़क़्र पर थाकहीं ऐसा शाह-ए-वाला कोई था, ना है, ना होगा
सहे ज़ुल्म जिस ने फिर भी न किसी को बद-दुआ दीकभी मेहरबान ऐसा कोई था, ना है, ना होगा
जिसे अपने घर बुलाया उसे बे-तलब नवाज़ाकहीं मेज़बान ऐसा कोई था, ना है, ना होगा
वो ग़रीब-ओ-बे-नवाँ का, वो यतीम-ओ-बे-कसाँ काकभी ग़म-गुसार उन सा कोई था, ना है, ना होगा
है मुईं ग़ुलाम जिन का हैं वो बहर-ओ-बर के वालीदो-जहाँ में ऐसा आक़ा कोई था, ना है, ना होगा
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