मरने की है तमन्ना ना जीने की आरज़ूदश्ते-नबी से जाम को पीने की आरज़ू
इस बेख़ुदी के साथ निकल जाए मेरा दमगलियों में यार की, ये कमीने की आरज़ू
हुस्न तो मिल गया है युसूफ को दोस्तो,फूलों को मुस्तफ़ा के पसीने की आरज़ू
इतना हसीन हो जो भरे आँखें नूर सेकिस्मत जगा दे ऐसे नगीने की आरज़ू
मंजधार में तिरे जो, तूफ़ान से लड़े जोडूबे कभी ना ऐसे सफीने की आरज़ू
मांगा किसी ने ज़र और मरने के वास्तेआ कर दरे नबी पे किसी ने की आरज़ू
खाए वतन के नाम पर जो खुद पे गोलियांया रब ! मुझे भी उस ही सीने की आरज़ू
जो भी वहां पे मर गया बेख़ुद, जी गयामुझ को वहां पे मरके है जीने की आरज़ू
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