नात लिरिक्स

Marhaba Marhaba Marhaba Makki Madani

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी

नात ख़्वान: मुहम्मद अमीन अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

सुब्ह तयबा में हुई, बटता है बाड़ा नूर कासदक़ा ले ने नूर का, आया है तारा नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

बाग़-ए-तयबा में सुहाना फूल फूला नूर कामस्त-ए-बू हैं बुलबुलें पढ़ती हैं कलिमा नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

मैं गदा तू बादशाह भर दे पियाला नूर कानूर दिन दूना तेरा, दे डाल सदक़ा नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

जो गदा देखो लिए जाता है तोड़ा नूर कानूर की सरकार है, क्या इस में तोड़ा नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

ताज वाले ! देख कर तेरा 'इमामा नूर कासर झुकाते हैं इलाही बोल-बाला नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

तेरी नस्ल-ए-पाक में है बच्चा बच्चा नूर कातू है 'ऐन-ए-नूर तेरा सब घराना नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

काफ़ गेसू, हा दहन, या अब्रू, आँखें 'ऐन सादकाफ़-हा-या-'ऐन-साद उन का है चेहरा नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

चाँद झुक जाता जिधर उँगली उठाते महद मेंक्या ही चलता था इशारों पर खिलौना नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

नारियों का दौर था दिल जल रहा था नूर कातुम को देखा हो गया ठंडा कलेजा नूर का

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

या हबीब-ए-किब्रिया ! अहलं-व्व-सहलन मरहबामुस्तफ़ा-ओ-मुज्तबा ! अहलं-व्व-सहलन मरहबा

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

जश्न-ए-मीलादुन्नबी है, क्यूँ न झूमें आज हममुस्कुराती हैं बहारें, सब फ़ज़ा पुर-नूर है

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

आमिना ! तुझ को मुबारक शाह का मीलाद होतेरा आँगन नूर, तेरा घर का घर सब नूर है

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

ग़म के मारो ! बे-सहारो ! बस तुम्हारी 'ईद हैहो गया बख़्शिश का सामाँ 'ईद-ए-मीलादुन्नबी

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

"हूँ ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा" अपना तो दा'वा है यहीकाश ! आक़ा भी ये फ़रमा दें हमें मंज़ूर है

मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !मरहबा मरहबा मरहबा मक्की मदनी !

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