नात लिरिक्स

Marhaba Mah-e-Ramzan Phir Aa Gaya

मरहबा माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रमज़ान ! या रमज़ान !या रमज़ान ! या रमज़ान !

रोज़े-दारो ! अल्लाह के प्यारो !माह-ए-रमज़ाँ को दिल से मनाना है

दिल की कलियाँ खिली, फ़ज़्ल-ए-रब्बुल-'उलामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गयातौबा करने का है फिर से मौक़ा' मिलामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

सहर-ओ-इफ़्तार में हैं 'अजब रौनक़ेंरब्ब-ए-'आलम ने बख़्शी हमें ने'मतेंआओ दिल से करें शुक्र-ए-मौला अदामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

रहमत का महीना ! रमज़ाँ !बख़्शिश का ख़ज़ीना ! रमज़ाँ !मौला का महीना ! रमज़ाँ !रोज़ों का महीना ! रमज़ाँ !बरकत ही बरकत ! रमज़ाँ !चाहत ही चाहत ! रमज़ाँ !ने'मत ही ने'मत ! रमज़ाँ !मक्के में दिखा दे ! रमज़ाँ !तयबा में दिखा दे ! रमज़ाँ !ज़मज़म भी पिला दे ! रमज़ाँ !

मोमिनो ! रब का हम पे ये एहसान हैफिर से हम को मिला माह-ए-रमज़ान है'अमल-ए-सालेह करो, पाओ रब की रिज़ामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

रहमत लाया है, बरकत लाया हैरमज़ाँ आया है, रमज़ाँ आया है

मस्जिदों में नमाज़ी भी हैं बे-शुमारकर रहे हैं सभी ज़िक्र-ए-परवरदिगारहै सुहानी घड़ी, नूर का है समा

रोज़े-दारो ! अल्लाह के प्यारो !माह-ए-रमज़ाँ को दिल से मनाना है

दिल की कलियाँ खिली, फ़ज़्ल-ए-रब्बुल-'उलामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

मग़्फ़िरत और बख़्शिश का सामाँ लिएदिल की तारीकियों में सवेरा लिए'आसियों को 'अता करने क़ुर्ब-ए-ख़ुदामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

रहमतों का महीना है रमज़ाँबरकतों का महीना है रमज़ाँ'अज़मतों का महीना है रमज़ाँरिफ़'अतों का महीना है रमज़ाँ

माह-ए-रमज़ाँ है, जन्नत के दर खुल गएऔर जहन्नम के दरवाज़े बंद हो गएहर तरफ़ छाई है रहमत-ए-किब्रियामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

आओ 'इश्क़-ए-शह-ए-अंबिया माँग लेंमर्ज़-ए-'इस्याँ से कामिल शिफ़ा माँग लेंहोगी मक़बूल हम ने जो माँगी दु'आ

रोज़े-दारो ! अल्लाह के प्यारो !माह-ए-रमज़ाँ को दिल से मनाना है

बारिश-ए-नूर का कैसा फेरा हुआचार-सू रहमतों का बसेरा हुआज़र्रा ज़र्रा ये देने लगा है सदा

मरहबा ! मरहबा !मरहबा ! मरहबा !

दिल की कलियाँ खिली, फ़ज़्ल-ए-रब्बुल-'उलामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

दिल का पूरा, ख़ुदाया ! ये अरमान होसाल-ए-आइंदा तयबा में रमज़ान होतुझ से शौक़-ए-फ़रीदी की है इल्तिजामरहबा ! माह-ए-रमज़ान फिर आ गया

रोज़े-दारो ! अल्लाह के प्यारो !माह-ए-रमज़ाँ को दिल से मनाना है

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