नात लिरिक्स

Mangton Pe Nazar Ya Ganj-e-Shakar | Aabaad Rahe Tera Paakpattan

मँगतों पे नज़र या गंज-ए-शकर | आबाद रहे तेरा पाकपत्तन

नात ख़्वान: नुसरत फ़तेह अली ख़ानशायर: अब्दुल सत्तार नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मँगतों पे नज़र, या गंज-ए-शकर !आबाद रहे तेरा पाकपत्तनए ख़्वाजा क़ुतब के नूर-ए-नज़र !आबाद रहे तेरा पाकपत्तन

मँगतों पे नज़र हो, गंज-ए-शकर !आबाद रहे तेरा पाकपत्तनए ख़्वाजा क़ुतब के नूर-ए-नज़र !आबाद रहे तेरा पाकपत्तन

तेरी दीद को अपनी 'ईद कहेंसब तुझ को फ़रीद फ़रीद कहेंदेते हैं सदा साबिर कलियरआबाद रहे तेरा पाकपत्तन

यूँ, बाबा ! तेरी बरात सजीपीछे हैं वली, आगे हैं 'अलीनबियों के नबी भी तेरे घरआबाद रहे तेरा पाकपत्तन

सेहरे की रंगत अजमेरीहैं नूर की तारें हजवेरीमख़्दूम निज़ाम पढ़ें मिल करआबाद रहे तेरा पाकपत्तन

मैं क्यूँ न फ़रीद फ़रीद करूँमैं क्यूँ न तेरी चौखट चूमूँहै दर तेरा जन्नत का दरआबाद रहे तेरा पाकपत्तन

हो ख़ैर ग़रीब नवाज़ी कीकर पूरी आस नियाज़ी कीहोती है यहीं मँगतों की गुज़रआबाद रहे तेरा पाकपत्तन

हो ख़ैर ग़रीब नवाज़ी कीभरो झोली ग़रीब नियाज़ी कीहोती है यहीं मँगतों की गुज़रआबाद रहे तेरा पाकपत्तन

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