नात लिरिक्स

Mangte Hain Karam Unka Sada Maang Rahe Hain | Din Raat Madine Ki Dua Maang Rahe Hain

मँगते हैं करम उन का सदा माँग रहे हैं | दिन रात मदीने की दुआ माँग रहे हैं

नात ख़्वान: नुसरत फ़तेह अली ख़ानशायर: ख़ालिद महमूद ख़ालिद नक्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मँगते हैं करम उन का सदा माँग रहे हैंदिन रात मदीने की दु'आ माँग रहे हैं

कम माँग रहे हैं न सिवा माँग रहे हैंजैसा है ग़नी वैसी 'अता माँग रहे हैं

हर ने'मत-ए-कौनैन है दामन में हमारेहम सदक़ा-ए-महबूब-ए-ख़ुदा माँग रहे हैं

ऐ दर्द-ए-मोहब्बत ! अभी कुछ और फ़ुज़ूँ होदीवाने तड़पने की अदा माँग रहे हैं

यूँ खो गए सरकार के अल्ताफ़-ओ-करम मेंये भी तो नहीं होश कि क्या माँग रहे हैं

असरार करम के फ़क़त उन पर ही खुले हैंजो तेरे वसीले से दु'आ माँग रहे हैं

सरकार का सदक़ा मेरे सरकार का सदक़ामोहताज-ओ-ग़नी, शाह-ओ-गदा माँग रहे हैं

इस दौर-ए-तरक़्क़ी में भी ज़ेहनों के अँधेरेख़ुर्शीद-ए-रिसालत की ज़िया माँग रहे हैं

ये मान लिया है कि तेरा दर्द है दरमाँतालिब हैं शिफ़ा के न दवा माँग रहे हैं

हम को भी मिले दौलत-ए-दीदार का सदक़ादीदार की जुरअत भी, शहा ! माँग रहे हैं

सरकार से सरकार को माँगा नहीं जाताइतनी बड़ी सरकार से क्या माँग रहे हैं

अब लाज तेरे हाथ है, ऐ रहमत-ए-कौनैन !मदफ़न को मदीने में जगह माँग रहे हैं

दामान-ए-'अमल में कोई नेकी नहीं, ख़ालिद !बस ना'त-ए-मुहम्मद का सिला माँग रहे हैं

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