नात लिरिक्स

Mana Ke Gunahon Mein Giraftar Hun Maula

माना कि गुनाहों में गिरफ़्तार हूँ मौला

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: जुनैद क़ासमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

माना कि गुनाहों में गिरफ़्तार हूँ, मौला !पर तेरी 'अताओं का तलबगार हूँ, मौला !

तू मेरी ख़ताओं को 'अताओं में बदल देबिन तेरी 'अताओं के मैं लाचार हूँ, मौला !

भटका हुआ राही हूँ, सही राह दिखा देरंगीनी-ए-दुनिया से मैं बेज़ार हूँ, मौला !

इस रात के सदक़े में ख़ता माफ़ हो मेरीमैं अपनी ख़ताओं पे शरमसार हूँ, मौला !

पहचान, जुनैद ! उन की सना हश्र में होगीनिस्बत के बिना उन की मैं बेकार हूँ, मौला !

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