नात लिरिक्स

Madine Ki Mitti Hai Sab Se Nirali | Madine Matti Hai Sab Se Nirali

मदीने की मिट्टी है सब से निराली

नात ख़्वान: अलीशा कियानीशायर: अज़ीज़ुद्दीन ख़ाकीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीने की मिट्टी है सब से निरालीमदीने में हैं सब जहानों के वाली

मदीने का पानी तो आब-ए-शिफ़ा हैवहाँ की हवा ज़िंदगी देने वाली

हुआ होता पैदा जो दौर-ए-नबी मेंमैं दिन-रात सुनता अज़ान-ए-बिलाली

वो महबूब-ए-दावर हैं साक़ी-ए-कौसरख़ुदा ने कभी बात उन की न टाली

मुझे भी मदीने बुलाएँगे आक़ामैं जी भर के देखूँगा रौज़े की जाली

जिन्हें रब ने मे'राज तोहफ़े में बख़्शीवही तो ख़ुदा के हैं महबूब-ए-'आली

मिला नाम-ए-नामी मुहम्मद का सदक़ाइसी नाम ने सब की 'इज़्ज़त बचा ली

पसीना शह-ए-दीं का है रश्क-ए-'अम्बरवहीं से गुलों ने वो ख़ुश्बू चुरा ली

वही सब से आ'ला, वही सब से बालावही रब के प्यारे, वही सब से 'आली

मुझे अपने क़दमों में रख लीजिएगामैं आऊँगा इक रोज़ बन कर सवाली

कराची से भेजे हैं ख़ाकी ने आक़ासलामों के तोहफ़े, दुरूदों की डाली

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