नात लिरिक्स

Madine Ke Aaqa Salamun Alaika

मदीने के आक़ा सलामुन अलैका

नात ख़्वान: हाफ़िज़ मुहम्मद ख़ान क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीने के आक़ा ! सलामुन-'अलैकादो 'आलम के शाहा ! सलामुन-'अलैका

ज़मीं में मुहम्मद, ज़माँ में मुहम्मदमकीं में मुहम्मद, मकाँ में मुहम्मदहर इक शय में जल्वा रसूल-ए-ख़ुदा कासलामुन-'अलैका, सलामुन-'अलैका

मदीने के आक़ा ! सलामुन-'अलैकादो 'आलम के शाहा ! सलामुन-'अलैका

गुनाहों ने घेरा, ख़ताओं ने घेरामुसीबत ने घेरा, बलाओं ने घेराबचा लीजिएगा, बचा लीजिएगासलामुन-'अलैका, सलामुन-'अलैका

मदीने के आक़ा ! सलामुन-'अलैकादो 'आलम के शाहा ! सलामुन-'अलैका

हमारी भी क़िस्मत बना दो, नबी जी !नसीबा भी सोया जगा दो, नबी जी !हमें अपना रौज़ा दिखा दीजिएगासलामुन-'अलैका, सलामुन-'अलैका

मदीने के आक़ा ! सलामुन-'अलैकादो 'आलम के शाहा ! सलामुन-'अलैका

न दौलत तलब है, न शोहरत तलब हैहुकूमत तलब है न 'इज़्ज़त तलब हैनवासों का सदक़ा 'अता कीजिएगासलामुन-'अलैका, सलामुन-'अलैका

मदीने के आक़ा ! सलामुन-'अलैकादो 'आलम के शाहा ! सलामुन-'अलैका

हूँ मोहताज में आप की इक नज़र काफ़िदा आप पर मेरे माँ-बाप, आक़ा !कि अरशद पे नज़र-ए-करम कीजिएगासलामुन-'अलैका, सलामुन-'अलैका

मदीने के आक़ा ! सलामुन-'अलैकादो 'आलम के शाहा ! सलामुन-'अलैका

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