नात लिरिक्स

Madad Kar Meri Do Jahanon Ke Malik

मदद कर मेरी दो जहानों के मालिक

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदद कर मेरी, दो जहानों के मालिक !मुसीबत में मैं ने पुकारा है तुझ को

गुनाहों की दलदल में मैं फँस गया हूँनिकलने की राहें हुईं बंद सारीवो नय्या मेरी डूबती जा रही हैबचा ले उसे तू, ख़ुदावंद-ए-बारीकिसी से कोई वास्ता ही नहीं हैतेरा जब से, ख़ालिक़ ! सहारा है मुझ को

मदद कर मेरी, दो जहानों के मालिक !मुसीबत में मैंने पुकारा है तुझ को

तेरा नाम ह़य्य और क़य्यूम भी हैतुझे नींद आती नहीं एक पल भीतू ही थामता है ज़मीं आसमाँ कोहवाएँ भी हैं हुक्म से तेरे चलतींमुझे थाम ले और बचा ले मुझे तूबहुत दूर लगता किनारा है मुझ को

मदद कर मेरी, दो जहानों के मालिक !मुसीबत में मैंने पुकारा है तुझ को

तू राज़िक़ है सब का, जहानों के मालिक !ज़मीं आसमाँ में तेरी बादशाहीतू ही बख़्शता है दिनों को उजालेकि रातों को देता है तू ही सियाहीक़ुशादा मेरा रिज़्क़ कर दे, ऐ मालिक !ये कहने को दिल ने उभारा है मुझ को

मदद कर मेरी दो जहाँनों के मालिकमुसीबत में मैंने पुकारा है तुझ को

तेरी बंदगी तो मेरी ज़िंदगी हैमेरी ज़िंदगी का तो हासिल यही हैमैं सज्दे पे सज्दे किए जा रहा हूँये गर्दन मेरी तेरे दर पर झुकी हैक़लम फेर दे ख़ुद मेरी हर ख़ता परमैं मिट जाऊँ कैसे गवारा है मुझ को

मदद कर मेरी, दो जहानों के मालिक !मुसीबत में मैंने पुकारा है तुझ को

तेरा नाम सत्तार-ओ-ग़फ़्फ़ार भी हैये बंदा तो 'आजिज़ गुनहगार भी हैइलाही ! मेरा सर है सज्दे में रक्खाज़बाँ पर मेरी आज इक़रार भी हैज़माने से मुँह मोड़ कर आ गया हूँफ़क़त एक तेरा सहारा है मुझ को

मदद कर मेरी, दो जहानों के मालिक !मुसीबत में मैंने पुकारा है तुझ को

मेरे हाथ उठते नहीं हैं दु'आ कोकभी ग़ैर के दर पे जा कर, ख़ुदाया !तू हाजत-रवा है, तू मुश्किल-कुशा हैइसी बात पर तो मैं ईमान लायाहर इक शय है क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत में तेरेये ईमान जाँ से भी प्यारा है मुझ को

मदद कर मेरी, दो जहानों के मालिक !मुसीबत में मैंने पुकारा है तुझ को

नशीद-ख़्वाँ:अब्दुल आ'ला अब्दुल अज़ीमओवैस-उल-हसन

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