नात लिरिक्स

Log Mushkil Mein Zamaane Ki Taraf Dekhte Hain | Ham Muhammad Ke Gharaane Ki Taraf Dekhte Hain

लोग मुश्किल में ज़माने की तरफ़ देखते हैं | हम मुहम्मद के घराने की तरफ़ देखते हैं

नात ख़्वान: शहरोज़ क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लोग मुश्किल में ज़माने की तरफ़ देखते हैंहम मुहम्मद के घराने की तरफ़ देखते हैं

आसमाँ पर भी हुकूमत है मेरे आक़ा कीचाँद-सूरज तेरी ऊँगली की तरफ़ देखते हैं

चाँद-तारों पे हुकूमत है मेरे आक़ा कीचाँद-सूरज तेरी ऊँगली की तरफ़ देखते हैं

जो भी मीलाद सजाता है मेरे आक़ा काआक़ा रौज़े से उसी घर की तरफ़ देखते हैं

जो भी महफ़िल को सजाता है मेरे आक़ा कीआक़ा रौज़े से उसी घर की तरफ़ देखते हैं

तेरे बच्चों ही के सदक़े से पले घर मेराहम तो ज़हरा की 'अताओं की तरफ़ देखते हैं

आ पड़े जब कोई मुश्किल तो नहीं घबरातेहम 'अली वाले हैं, उन्हीं की तरफ़ देखते हैं

ख़ाली जाए कोई मँगता ये गवारा ही नहींझोली भर भर के वो साइल की तरफ़ देखते हैं

है मेरी माँ की दु'आ ना'त जो पढ़ता हूँ मैंरश्क से अहल-ए-हुनर मेरी तरफ़ देखते हैं

होगा जब हश्र बपा देखेंगे उस दिन मुन्किरआक़ा अपने ही ग़ुलामों की तरफ़ देखते हैं

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