नात लिरिक्स

Laye Tashreef Duniya Mein Khairul Wara

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वरा

नात ख़्वान: मौलाना मुनीर अहमदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तल'अल-बद्रु 'अलैनामिन सनिय्यातिल-वदा'इवजब-श्शुक्रु 'अलैनामा द'आ लिल्लाहि दा'इ

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वराहक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामनेकुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगेआए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने

चाँद से ख़ूब-तर है रुख़-ए-मुस्तफ़ाउन को देखा तो ये 'आइशा ने कहाफीकी फीकी सी लगती थी उस की ज़ियाचाँद जब तक रहा आमने-सामने

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वराहक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामनेकुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगेआए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने

एक दिन बू-जहल ने नबी से कहाये बता आज है मेरी मुट्ठी में क्यादस्त-ए-बू-जहल में कंकरी ने कियावस्फ़-ए-शाह-ए-हुदा आमने-सामने

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वराहक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामनेकुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगेआए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने

कुफ़्र ने फिर उठाया ये फ़ितना नयाहै नबी तो करे चाँद टुकड़े ज़रादेखते देखते चाँद शक़ हो गयाजब नबी ने कहा आमने-सामने

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वराहक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामनेकुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगेआए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने

क़त्ल का जब 'उमर ने इरादा कियाजज़्बा-ए-शौक़ अरक़म के घर ले गयादेखते ही जमाल-ए-रुख़-ए-मुस्तफ़ादिल से कलमा पढ़ा आमने-सामने

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वराहक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामनेकुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगेआए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने

गुम-शुदा एक सूई का है वाक़ि'आजाने कब तक उसे ढूँडतीं 'आइशारात की तीरगी में उजाला लिएआ गए मुस्तफ़ा आमने-सामने

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वराहक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामनेकुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगेआए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने

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