नात लिरिक्स

Lau Madine Ki Tajalli Se Lagae Hue Hain

लौ मदीने की तजल्ली से लगाए हुए हैं

शायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी

लौ मदीने की तजल्ली से लगाए हुए हैंदिल को हम मतलए अनवार बनाए हुए हैं

एक जलक आज दिखा गुम्बद-ए-ख़ज़रा के मकींकुछ भी हैं दूर से दीदार को आए हुए हैं

सर पे रख दीजिए ज़रा दस्त-ए-तसल्ली आक़ाग़म से मारे हैं, ज़माने के सताए हुए हैं

नाम किस मुँह से लें के तेरे कहलाएंतेरी निस्बत के तक़ाज़ों को भुलाए हुए हैं

घट गया है तेरी तअलीम से रिस्ता अपनाग़ैर के साथ रह-रस्म बढ़ाए हुए हैं

शर्म-ए-इस्यां से नहीं सामने जाया जाताये भी क्या कम है तेरे शहर में आए हुए हैं

तेरी निस्बत ही तो है जिस की बदौलत हम लोगकुफ्र के दौर में ईमान बचाए हुए हैं

काश दीवाना बनालें वो हमें भी अपनाएक दुनिया को जो दीवाना बनाए हुए हैं

अल्लाह अल्लाह मदीने पे ये जल्वों की फ़वारबारिश-ए-नूर में सब लोग नहाए हुए हैं

क्यों न पलड़ा तेरे आ'माल का भारी हो नसीरअब तो मीज़ान पे सरकार भी आए हुए हैं

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