नात लिरिक्स

Lahad Mein Aaqa Ki Deed Hogi | Main Saj Ke Ghar Se Nikal Raha Hun

लहद में आक़ा की दीद होगी | मैं सज के घर से निकल रहा हूँ

नात ख़्वान: अबुल हसन नूरीशायर: अबुल हसन नूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लहद में आक़ा की दीद होगीमैं सज के घर से निकल रहा हूँमेरे 'अज़ीज़ो ! ये रोना कैसा ?मकान ही तो बदल रहा हूँ

लगा के ख़ुश्बू मैं सो रहा हूँमुझे, फ़रिश्तो ! उठाओ जल्दीनबी हमारे हैं सामने अबख़ुशी के मारे मचल रहा हूँ

हों बा'द में ये सवाल पहलेनकीरो ! आक़ा का ज़िक्र छेड़ोमिलन की शब है, कफ़न में अपनेख़ुशी के मारे मचल रहा हूँ

गुनाह की गठरी है भारी सर पेहुज़ूर ! कैसे मैं गुज़रूँ पुल से ?बचा लो आ कर, शफ़ी-ए-महशर !कि पुल से अब मैं फिसल रहा हूँ

किसी के दर का फ़क़ीर हूँ मैंमोहब्बतों का असीर हूँ मैंमैं बे-सहारा नहीं हूँ, लोगो !नबी के टुकड़ों पे पल रहा हूँ

मेरे जनाज़े पे रोने वालो !फ़रेब में हो, ब-ग़ौर देखोमरा नहीं हूँ, ग़म-ए-नबी मेंलिबास-ए-हस्ती बदल रहा हूँ

बड़ी कठिन हैं, हसन ! ये रातेंसुनाते रहिए नबी की ना'तेंसुकून मिलता है दर्द-ए-दिल कोमैं ना'त सुन के बहल रहा हूँ

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