नात लिरिक्स

Kyun Chand Mein Khoye Ho Uljhe Ho Sitaron Mein

क्यूँ चाँद में खोए हो उलझे हो सितारों में

नात ख़्वान: तसनीम आरिफ़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्यूँ चाँद में खोए हो, उलझे हो सितारों मेंआक़ा को मेरे ढूँडो क़ुरआन के पारों में

उन के ही पसीने की ख़ुश्बू है बहारों मेंउन की ही तजल्ली है इन चाँद-सितारों में

सरकार-ए-दो-'आलम की उल्फ़त में जो मरते हैंअल्लाह के वो बंदे ज़िंदा हैं मज़ारों में

ऐ काश ! कबूतर ही हम बन के रहे होतेउस गुंबद-ए-ख़ज़रा के पुर-नूर मिनारों में

जिब्रील-ए-अमीं बोले, सिदरा के मकीं बोलेतुम सा न हसीं देखा लाखों में हज़ारों में

रिज़वाँ ! तेरी जन्नत को देखूँ जो मिले फ़ुर्सतखोई हैं अभी नज़रें तयबा के नज़ारों में

आ तुझ को बता दूँ कि जन्नत किसे कहते हैंआ बैठ ज़रा मिल कर हम दर्द के मारों में

अल्लाह ने उम्मत की बख़्शिश का किया वा'दामहबूब को जब देखा रोते हुए ग़ारों में

तयबा के फ़क़ीरों की ठोकर में ज़माना हैतारीख़ बताती है ये राज़ इशारों में

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