नात लिरिक्स

Kyun Aaj Chand Tare Aankhen Bichha Rahe Hain

क्यूँ आज चाँद तारे आँखें बिछा रहे हैं

नात ख़्वान: सक़लैन वज़ाहत बनारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्यूँ आज चाँद तारे आँखें बिछा रहे हैंमक्का-मदीने वाले तशरीफ़ ला रहे हैं

राहों में उन की दुश्मन काँटे बिछा रहे हैंलेकिन हुज़ूर उन को सीने लगा रहे हैं

गुलशन हरे भरे हैं, कलियाँ महक रही हैंख़ुश्बू बता रही है सरकार आ रहे हैं

यूसुफ़ की दिल-कशी पर अंगुश्त ही कटी हैतेरे नाम पर सहाबा गर्दन कटा रहे हैं

जन्नत में जाने का वो रस्ता बना रहे हैंमाँ-बाप का जो अपने पाँव दबा रहे हैं

अल्लाह ! मेरी उम्मत मेरे हवाले कर देरो रो के प्यारे आक़ा रब को मना रहे हैं

उम्मत का ग़म है कैसा पूछे कोई नबी सेसज्दे में प्यारे आक़ा आँसू बहा रहे हैं

अल्लाह रे ! ये ताक़त शेर-ए-ख़ुदा की देखोहाथों में अपने बाब-ए-ख़ैबर नचा रहे हैं

ग़ौस-उल-वरा की 'अज़मत तू जानता नहीं हैफ़रमा के क़ुम बि-इज़्नी मुर्दे जिला रहे हैं

साबिर की शान पहले तू देख ले, ऐ नज्दी !अपना जनाज़ा साबिर ख़ुद ही पढ़ा रहे हैं

ऐ काश ! मुझ से कह दे बाद-ए-सबा ये आ करसक़लैन ! चल मदीना, आक़ा बुला रहे हैं

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