नात लिरिक्स

Kya Ye Kam Hai Inayat Khuda Ki Zikr-e-Shah-e-Umam Mil Gaya Hai

क्या ये कम है इनायत ख़ुदा की ज़िक्र-ए-शाह-ए-उमम मिल गया है

नात ख़्वान: उमैर ज़ुबैरशायर: क़ारी नो'मान अनवरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! आक़ा !आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! आक़ा !

इस करम का करूँ शुक्र कैसे अदाजो करम मुझ पे मेरे नबी कर दियामैं सजाता था सरकार की महफ़िलेंमुझ को हर ग़म से रब ने बरी कर दिया

क्या ये कम है 'इनायत ख़ुदा की, ज़िक्र-ए-शाह-ए-उमम मिल गया हैग़म ज़माने के हूँ भूल बैठा, जब से तयबा का ग़म मिल गया है

क्या ये कम है 'इनायत ख़ुदा की, ज़िक्र-ए-शाह-ए-उमम मिल गया है

मैं हूँ मँगता शह-दो-सरा का, ग़ैर के दर से क्यूँ जा के माँगूँजो भी माँगा नबी के वसीले, मुझ को रब की क़सम मिल गया है

क्या ये कम है 'इनायत ख़ुदा की, ज़िक्र-ए-शाह-ए-उमम मिल गया है

उन की रहमत तनी है यूँ सर पे, धूप में जैसे छाओं 'अता होनाम-ए-अहमद बना है सहारा, जब भी रंज-ओ-अलम मिल गया है

क्या ये कम है 'इनायत ख़ुदा की, ज़िक्र-ए-शाह-ए-उमम मिल गया है

सदक़ा-ए-पंजतन ज़िंदगानी, शादमानी में ही कट रही हैसब से हूँ मैं अमीर अब जहाँ में, पंजतन का करम मिल गया है

क्या ये कम है 'इनायत ख़ुदा की, ज़िक्र-ए-शाह-ए-उमम मिल गया है

दीन-ओ-दुनिया में, नो'मान अनवर ! ना'त मेरा हवाला बनी हैसिर्फ़ लिखे जो मद्ह-ए-शह-ए-दीं, मुझ को ऐसा क़लम मिल गया है

क्या ये कम है 'इनायत ख़ुदा की, ज़िक्र-ए-शाह-ए-उमम मिल गया है

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