नात लिरिक्स

Kya Martaba Hai Hazrat-e-Usman-e-Ghani Ka

क्या मर्तबा है हज़रत-ए-उस्मान-ए-ग़नी का

नात ख़्वान: ज़ुल्फ़िक़ार अली हुसैनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्या मर्तबा है हज़रत-ए-'उस्मान-ए-ग़नी काजन्नत है सिला उल्फ़त-ए-'उस्मान-ए-ग़नी का

ज़ुन्नूर सहाबा में फ़क़त ज़ात थी उन कीहै राज़ यही हुरमत-ए-'उस्मान-ए-ग़नी का

थे जूद-ओ-सख़ा में भी वो मशहूर-ए-ज़मानाचर्चा था अगर दौलत-ए-'उस्मान-ए-ग़नी का

इक लहजा-ए-क़िरअत पे हैं क़ुरआन के जामे'ए'ज़ाज़ है ये हज़रत-ए-'उस्मान-ए-ग़नी का

लाज़िम है मवद्दत भी उसे आल-ए-नबी कीदा'वा हो जिसे निस्बत-ए-'उस्मान-ए-ग़नी का

शादाँ है रशीद आल-ए-पयम्बर की रज़ा मेंरखता है शरफ़ मिदहत-ए-'उस्मान-ए-ग़नी का

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