नात लिरिक्स

Kya Bataun Kitni Hain Khubiyan Madine Mein

क्या बताऊँ कितनी हैं ख़ूबियाँ मदीने में

नात ख़्वान: हाफ़िज़ मुनीर अहमदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्या बताऊँ कितनी हैं ख़ूबियाँ मदीने मेंख़ार को भी चूमे हैं तितलियाँ मदीने में

ज़ाहिदों की साँसें भी इस तरह नहीं चलतींजिस अदब से चलती हैं आँधियाँ मदीने में

आए जब मेरे आक़ा, कह रही थीं ये माएँदफ़्न अब नहीं होंगी बेटियाँ मदीने में

जब भी उन के दर जाऊँ, क़ैद हो के रह जाऊँहैं रिहाई से बेहतर बेड़ियाँ मदीने में

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