नात लिरिक्स

Koi Duniya-e-Ata Mein Nahin Hamta Tera | Tazmeen of Waah ! Kya Jood-o-Karam Hai, Shah-e-Bat.ha ! Tera

कोई दुनिया-ए-अता में नहीं हमता तेरा | तज़मीन - वाह ! क्या जूद-ओ-करम है, शह-ए-बतहा ! तेरा

नात ख़्वान: सरवर हुसैन नक़्शबंदी - ज़ोहैब अशरफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कोई दुनिया-ए-'अता में नहीं हमता तेराहो जो हातिम को मुयस्सर ये नज़ारा तेराकह उठे देख के बख़्शिश में ये रुत्बा तेरावाह ! क्या जूद-ओ-करम है, शह-ए-बतहा ! तेरानहीं सुनता ही नहीं माँगने वाला तेरा

कुछ बशर होने के नाते तुझे ख़ुद सा जानें !और कुछ महज़ पयामी ही ख़ुदा का जानें !इन की औक़ात ही क्या है कि ये इतना जानें !फ़र्श वाले तेरी शौकत का 'उलू क्या जानें !ख़ुसरवा ! अ़र्श पे उड़ता है फरेरा तेरा

मुझ से ना-चीज़ पे है तेरी 'इनायत कितनीतू ने हर गाम पे की मेरी हिमायत कितनीक्या बताऊँ ! तेरी रहमत में है वुस'अत कितनीएक मैं क्या ! मेरे 'इस्याँ की हक़ीक़त कितनी !मुझ से सो लाख को काफ़ी है इशारा तेरा

नज़र-ए-'उश्शाक़-ए-नबी है ये मेरा हर्फ़-ए-ग़रीबमिम्बर-ए-वा'ज़ पे लड़ते रहें आपस में ख़तीबये अक़ीदा रहे अल्लाह करे मुझ को नसीबमैं तो मालिक ही कहूँगा कि हो मालिक के हबीबया’नी महबूब-ओ-मुहिब में नहीं मेरा तेरा

कई पुश्तों से ग़ुलामी का ये रिश्ता है बहालयहीं तिफ़्ली-ओ-जवानी के बिताए मह-ओ-सालअब बुढ़ापे में, ख़ुदारा ! हमें यूँ दर से न टालतेरे टुकड़ों पे पले ग़ैर की ठोकर पे न डालझिड़कियाँ खाएँ कहाँ छोड़ के सदक़ा तेरा

तुझ से हर-चंद वो हैं क़द्र-ओ-फ़ज़ाइल में रफ़ी'अकर, नसीर ! आज मगर फ़िक्र-ए-रज़ा की तौसी'अपास है उस के शफ़ा'अत का वसीला भी वक़ी'अतेरी सरकार में लाता है रज़ा उस को शफ़ी'अजो मेरा ग़ौस है और लाडला बेटा तेरा

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन :पीर नसीरुद्दीन नसीर

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