नात लिरिक्स

Khushbuon Se Dar-o-Deewar Sanwar Jate Hain

ख़ुश्बूओं से दर-ओ-दीवार सँवर जाते हैं

नात ख़्वान: मुमताज़ टांडवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुश्बूओं से दर-ओ-दीवार सँवर जाते हैंजिस गली से मेरे सरकार गुज़र जाते हैं

महफ़िल-ए-आल-ए-नबी घर में सजाते रहिएज़िक्र-ए-शब्बीर से हालात सँवर जाते हैं

अपनी बख़्शिश की सनद मैं ने उन्हें माना हैज़िक्र-ए-सरकार में लम्हें जो गुज़र जाते हैं

शहर-ए-सरकार की नूरानी फ़िज़ा ज़िंदाबादरौशनी लेने जहाँ शम्स-ओ-क़मर आते हैं

बिल-यक़ीं ना'त के अश'आर वही हैं सच्चेकान में पढ़ते ही जो दिल में उतर जाते हैं

'अज़मत-ए-शहर-ए-मदीना हो बयाँ कैसे जहाँनूरी क़ुदसी भी समेटे हुए पर आते हैं

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।