नात लिरिक्स

Khule Gunahon Ke Hain Nataij Ye Zalzale Rab Muaf Kar De

खुले गुनाहों के हैं नताइज ये ज़लज़ले रब मुआफ़ कर दे

शायर: समीउल्लाह सारिम अब्बासीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !

मु'आफ़ कर दे, मु'आफ़ कर देमु'आफ़ कर दे, मु'आफ़ कर देमु'आफ़ कर दे, मौला !

खुले गुनाहों के हैं नताइज, ये ज़लज़ले, रब ! मु'आफ़ कर देज़मीं शिकायत लगा रही है हमारी, ऐ रब ! मु'आफ़ कर दे

कोई नहीं काम की वो नेकी, कि वास्ता जिस का दे सकें हमसिवाए आ'माल-ए-बद के कुछ भी न कर सके, रब ! मु'आफ़ कर दे

मु'आफ़ कर दे, मौला !

खुले गुनाहों के हैं नताइज, ये ज़लज़ले, रब ! मु'आफ़ कर देज़मीं शिकायत लगा रही है हमारी, ऐ रब ! मु'आफ़ कर दे

बजा है इक़बाल-ए-जुर्म ठहरे हम बज़्म-ए-हस्ती में, ऐ ख़ुदाया !मगर जराइम के फैले असरात ना मिटे, रब ! मु'आफ़ कर दे

मु'आफ़ कर दे, मौला !

खुले गुनाहों के हैं नताइज, ये ज़लज़ले, रब ! मु'आफ़ कर देज़मीं शिकायत लगा रही है हमारी, ऐ रब ! मु'आफ़ कर दे

फ़लक पे बादल की घन-गरज और ज़मीं पे झटके ये ज़लज़लों केहमारी औक़ात क्या है ? हम को बताएँ ये, रब ! मु'आफ़ कर दे

मु'आफ़ कर दे, मौला !

खुले गुनाहों के हैं नताइज, ये ज़लज़ले, रब ! मु'आफ़ कर देज़मीं शिकायत लगा रही है हमारी, ऐ रब ! मु'आफ़ कर दे

यूँ मादी दुनिया में मस्त हैं हम, नहीं ख़बर क़ब्र-ओ-आख़िरत कीहै हैफ़ ! मुस्लिम यूँ फ़ानी में खो गए, मेरे रब ! मु'आफ़ कर दे

मु'आफ़ कर दे, मौला !

खुले गुनाहों के हैं नताइज, ये ज़लज़ले, रब ! मु'आफ़ कर देज़मीं शिकायत लगा रही है हमारी, ऐ रब ! मु'आफ़ कर दे

चलो, ऐ सारिम ! वली, नबी और सलफ़ के ढब पर, ख़ुदा के दर परकरें हम मिल कर यूँ आह-ओ-ज़ारी कि देख के रब मु'आफ़ कर दे

मु'आफ़ कर दे, मौला !

खुले गुनाहों के हैं नताइज, ये ज़लज़ले, रब ! मु'आफ़ कर देज़मीं शिकायत लगा रही है हमारी, ऐ रब ! मु'आफ़ कर दे

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