नात लिरिक्स

Khudawanda Mujhe Dard-o-Alam Se Ab Rihai De | Mujhe Gham Se Rihai De

ख़ुदावंदा मुझे दर्द-ओ-अलम से अब रिहाई दे | मुझे ग़म से रिहाई दे

शायर: दानिश आसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदा-वंदा ! मुझे दर्द-ओ-अलम से अब रिहाई देनिकलने की कोई तो राह अब मुझ को दिखाई दे

मेरे जज़्बात गरमा दे, मेरी तू रूह तड़पा देपरे जाऊँ फलक के मेरी हिम्मत को रसाई दे

जिसे इक आँख भी भाता नहीं हूँ आज मैं, या रब !उसे जब भी मोहब्बत मुझ से दे तू इंतिहाई दे

मुझे मा'लूम है इक घूँट भी हासिल नहीं होगाअगर रोज़-ए-जज़ा मालिक मुझे मेरी कमाई दे

अना अपनी अना ही बस मुझे महबूब हो जिस मेंन दे ऐसी ख़ुदाई तू भले चाहे गदाई दे

उसे यक-दम भी तूफ़ानों का आना क्या सताएगाजिसे हर वक़्त आहट बस अजल की ही सुनाई दे

अना का इस की, दानिश ! तुम बताओ हश्र क्या होगाजो आँसू ख़ुद बहाए और फिर ख़ुद ही वो दुहाई दे

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