ख़ुदा के प्यारे, नबी हमारे, रऊफ़ भी हैं, रह़ीम भी हैंशफ़ीअ़ भी हैं, रसूल भी हैं, मुताअ भी हैं, क़सीम भी हैं
ख़ुदा के प्यारे, नबी हमारे, रऊफ़ भी हैं, रह़ीम भी हैं
हर एक गुल में है रंग उनका, ज़ुबाने-बुलबुल में उनका नग़्माहै सब की आँखों में नूर उनका, वो सब के दिल में मुक़ीम भी हैं
ख़ुदा के प्यारे, नबी हमारे, रऊफ़ भी हैं, रह़ीम भी हैं
ये ला-दवा है मरज़ हमारा, तबीब क्यूँ कर करेंगे चाराइलाज मेरा करेंगे आक़ा, तबीब भी हैं, हकीम भी हैं
ख़ुदा के प्यारे, नबी हमारे, रऊफ़ भी हैं, रह़ीम भी हैं
नहीं है कुछ अर्ज़ की ज़रुरत, के उनपे रोशन है सब की हालतरसूले-अकरम समीअ़ भी हैं, बसीर भी हैं, अलीम भी हैं
ख़ुदा के प्यारे, नबी हमारे, रऊफ़ भी हैं, रह़ीम भी हैं
जमीले-रज़वीये-क़ादरी को ग़मे-अज़ाबे-अलीम क्यूँ होमदिनेवाले हैं उसके सर पर, मदद पे ग़ौसे-अज़ीम भी हैं
ख़ुदा के प्यारे, नबी हमारे, रऊफ़ भी हैं, रह़ीम भी हैं
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