नात लिरिक्स

Khidmat Ammi Abbu Ki | Adnan Pratapgarhi

ख़िदमत अम्मी अब्बू की

शायर: नज्म-ए-हसन प्रतापगढ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़िदमत अम्मी-अब्बू की, ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीहोटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

भाग रहा है क्यूँ, ऐ नादाँ ! इक दिन तू पछताएगाख़्वाहिश-ए-दुनिया लाख बड़ा ले लेकिन कुछ न पाएगाजन्नत में ले कर के जाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीसर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीहोटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

उस के सर की 'अज़मत क्या है ! तल्वा जिन का आ'ला हैरोज़-ए-महशर देखना उन का रुत्बा कितना आ'ला हैअल्लाह से बख़्शिश करवाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीसर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीहोटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

रहमत वाली नूरी चादर उस के सर पर रहती हैदोनों जहाँ की ने'मत उस के बाम-ओ-दर पर रहती हैजिन के हक़ में ने'मत आए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीसर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीहोटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

जौहरी जैसे सोने-चाँदी की हर क़ीमत जाने हैफ़रमाँ-दार बेटा वैसे इन की ख़िदमत जाने हैसोई क़िस्मत उस की जगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीहोटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

सर से बलाएँ दूर भगाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू कीहोटों पे मुस्कान सजाए ख़िदमत अम्मी-अब्बू की

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