नात लिरिक्स

Kabhi Un Ka Naam Lena Kabhi Un Ki Baat Karna

कभी उन का नाम लेना कभी उन की बात करना

शायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कभी उन का नाम लेना कभी उन की बात करनामेरा ज़ौक़ उन की चाहत, मेरा शौक़ उन पे मरना

वो किसी की झील आँखें, वो मेरी जुनूँ-मिज़ाजीकभी डूबना उभर कर, कभी डूब कर उभरना

तेरे मनचलों का जग में ये अजब चलन रहा हैन किसी की बात सुनना, न किसी से बात करना

शब-ए-ग़म न पूछ कैसे तेरे मुब्तला पे गुज़रीकभी आह भर के गिरना, कभी गिर के आह भरना

वो तेरी गली के तेवर, वो नज़र नज़र पे पहरेवो मेरा किसी बहाने तुझे देखते गुज़रना

कहाँ मेरे दिल की हसरत, कहाँ मेरी ना-रसाईकहाँ तेरे गेसुओं का तेरे दोश पर बिखरना

तेरे सामने से आ कर कोई आइना हटा देकि बढ़ा रहा है उलझन तेरी ज़ुल्फ़ का सँवरना

चले लाख चाल दुनिया, हो ज़माना लाख दुश्मनजो तेरी पनाह में हो उसे क्या किसी से डरना

वो करेंगे ना-ख़ुदाई तो लगेगी पार कश्तीहै, नसीर ! वर्ना मुश्किल, तेरा पार यूँ उतरना

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।