नात लिरिक्स

Kabe Pe Padi Jab Pehli Nazar Kya Cheez Hai Duniya Bhool Gaya

काबे पे पड़ी जब पहली नज़र क्या चीज़ है दुनिया भूल गया

नात ख़्वान: उम्म-ए-हबीबाशायर: जमील नक़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

का'बे पे पड़ी जब पहली नज़र, क्या चीज़ है दुनिया भूल गयायूँ होश-ओ-ख़िरद मफ़लूज हुए, दिल ज़ौक़-ए-तमाशा भूल गया

फिर रूह को इज़्न-ए-रक़्स मिला, ख़्वाबीदा-जुनूँ बेदार हुआतलवों का तक़ाज़ा याद रहा, नज़रों का तक़ाज़ा भूल गया

एहसास के पर्दे लहराए, ईमाँ की हरारत तेज़ हुईसज्दों की तड़प, अल्लाह-अल्लाह ! सर अपना सौदा भूल गया

जिस वक़्त दु'आ को हाथ उठे, याद आ न सका जो सोचा थाइज़्हार-ए-'अक़ीदत की धुन में, इज़्हार-ए-तमन्ना भूल गया

पहुँचा जो हरम की चौखट तक, इक अब्र-ए-करम ने घेर लियाबाक़ी न रहा ये होश मुझे, क्या माँग लिया, क्या भूल गया

हर वक़्त बरस्ती है रहमत का'बे में, जमील ! अल्लाह-अल्लाहख़ाती हूँ मैं कितना भूल गया, 'आसी हूँ मैं कितना भूल गया

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