नात लिरिक्स

Judai Se Ye Dil Phata Ja Raha Hai | Bata Mah-e-Ramzan Tu Kyun Ja Raha Hai

जुदाई से ये दिल फटा जा रहा है | बता माह-ए-रमज़ाँ तू क्यूँ जा रहा है

शायर: शारिक़ इनामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जुदाई से ये दिल फटा जा रहा हैबता, माह-ए-रमज़ाँ ! तू क्यूँ जा रहा है'अजब दर्द दिल में जगा जा रहा हैबता, माह-ए-रमज़ाँ ! तू क्यूँ जा रहा है

ख़ुशी है कि अब बाब-ए-जन्नत खुला हैजिधर देखो नेकी का इक सिलसिला हैमज़ा सहर-ओ-इफ़्तार में आ रहा हैबता, माह-ए-रमज़ाँ ! तू क्यूँ जा रहा है

नवाफ़िल की कसरत, तहज्जुद की लज़्ज़ततरावीह में क़ुरआँ की दिलकश तिलावतये दिल जाने कितना सुकूँ पा रहा हैबता, माह-ए-रमज़ाँ ! तू क्यूँ जा रहा है

ख़ुदा के ये बंदे, 'इबादत के ग़ाज़ीबने माह-ए-रमज़ाँ में सारे नमाज़ीख़ुदा नूर ही नूर बरसा रहा हैबता, माह-ए-रमज़ाँ ! तू क्यूँ जा रहा है

नबी की नुबुव्वत, ख़ुदा की ख़ुदाईका मक़्सद मिला तेरी आग़ोश में हीचराग़-ए-तमन्ना बुझा जा रहा हैबता, माह-ए-रमज़ाँ ! तू क्यूँ जा रहा है

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