नात लिरिक्स

Jo Na Hota Tera Jamal Hi | Sallu Alaihi Wa Aalihi

जो न होता तेरा जमाल ही | सल्लू अलैहि व आलिही

नात ख़्वान: ज़ुबैदा ख़ानमशायर: तनवीर नक़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो न होता तेरा जमाल हीसल्लू 'अलैहि व आलिही

जो न होता तेरा जमाल हीतो जहाँ था ख़्वाब-ओ-ख़याल हीसल्लू 'अलैहि व आलिही

मह-ओ-मेहर में तेरी रौशनीहुई ख़त्म तुझ पे पयंबरीनहीं तुझ सा तेरे सिवा कोईकरे कौन तेरी बराबरीये नहीं किसी की मजाल हीसल्लू 'अलैहि व आलिही

न फ़सील है, न महल-सरातेरा फ़र्श है वही बोरियातेरे जिस्म-ए-पाक पे इक क़बावो भी तार-तार है जा-ब-जातेरी सादगी है कमाल हीसल्लू 'अलैहि व आलिही

तू ख़लील है, तू कलीम हैतू रऊफ़ है, तू रहीम हैतू हबीब-ए-रब्ब-ए-करीम हैतेरी शान सब से 'अज़ीम हैनहीं कोई तेरी मिसाल हीसल्लू 'अलैहि व आलिही

तू कलीम है, तू करीम हैतू रऊफ़ है, तू रहीम हैतू हबीब-ए-रब्ब-ए-करीम हैतेरी शान सब से 'अज़ीम हैनहीं कोई तेरी मिसाल हीसल्लू 'अलैहि व आलिही

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