नात लिरिक्स

Jo Khayal Aaya To Khwab Mein Wo Jamal Apna Dikha Gaye

जो ख़याल आया तो ख़्वाब में वो जमाल अपना दिखा गए

शायर: मुहम्मद अकबर वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो ख़याल आया तो ख़्वाब में, वो जमाल अपना दिखा गएये महक लहक थी लिबास में कि मकान सारा बसा गए

हमें दाम-ए-ग़म से छुड़ा गए, हमें मा'सियत से बचा गएवो नबी मुहम्मद-ए-मुस्तफ़ा कि जो सू-ए-'अर्श-ए-'उला गए

ये, हलीमा ! भेद खुला नहीं, ये मक़ाम-ए-चून-ओ-चरा नहींतू ख़ुदा से पूछ वो कौन थे, तेरी बकरियाँ जो चरा गए

कहीं हुस्न बन के क़बूल में, कहीं रंग बन के वो फूल मेंकहीं नूर बन के रसूल में, वो जमाल अपना दिखा गए

हो दुरूद तुम पे हज़ार-हा, मेरे रहनुमा मेरे ना-ख़ुदामेरा पार बेड़ा लगा गए, मेरी डूबी कश्ती तिरा गए

तेरी झूँटी-खूँटी बची-खुची, जो मिली तो अकबर-ए-वारसीवो भरे नशे की तरंग में कि कहीं कहीं की सुना गए

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