नात लिरिक्स

Jo Ghulaam-e-Shah-e-Abraar Huaa, Khoob Huaa !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !

नात ख़्वान: हुसैन यूसुफ़ मेमनउपलब्ध: हिंदी

उन के जो ग़ुलाम हो गए, वक़्त के इमाम हो गएउन के जो ग़ुलाम हो गए, वक़्त के इमाम हो गए

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ख़ुल्द में जाने का हक़दार हुआ, ख़ूब हुआ !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ये करम जो, मेरे सरकार ! हुआ, ख़ूब हुआ !ख़्वाब में आप का दीदार हुआ, ख़ूब हुआ !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ख़ुल्द में जाने का हक़दार हुआ, ख़ूब हुआ !

बीच मँझधार में जब सू-ए-मदीना देखाडूबता बेड़ा मेरा पार हुआ, ख़ूब हुआ !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ख़ुल्द में जाने का हक़दार हुआ, ख़ूब हुआ !

रंज-ओ-आलाम ने जब भी किया रुख़ मेरी तरफ़करम-ए-आक़ा मदद-गार हुआ, ख़ूब हुआ !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ख़ुल्द में जाने का हक़दार हुआ, ख़ूब हुआ !

जिस घराने में है हसनैन-ओ-अली-ओ-ज़हराइस घराने से जिसे प्यार हुआ, ख़ूब हुआ !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ख़ुल्द में जाने का हक़दार हुआ, ख़ूब हुआ !

जिन पे नाज़ाँ हैं वफ़ाएँ भी उन्हीं में से एकग़ाज़ी अब्बास 'अलमदार हुआ, ख़ूब हुआ !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ख़ुल्द में जाने का हक़दार हुआ, ख़ूब हुआ !

आज अश'आर की सूरत में यहाँ, सूफ़ी ख़लील !उन की तौसीफ़ का इज़्हार हुआ, ख़ूब हुआ !

जो ग़ुलाम-ए-शह-ए-अबरार हुआ, ख़ूब हुआ !ख़ुल्द में जाने का हक़दार हुआ, ख़ूब हुआ !

उन के जो ग़ुलाम हो गए, वक़्त के इमाम हो गएउन के जो ग़ुलाम हो गए, वक़्त के इमाम हो गए

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