नात लिरिक्स

Jagmagaya Eid Se Har Ik Makan

जगमगाया ईद से हर इक मकाँ

शायर: हस्सान फ़ानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जगमगाया 'ईद से हर इक मकाँहो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

चाँद ने बढ़ कर मुबारकबाद दीशुक्र करते हैं सभी अहल-ए-जहाँ

हो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

जगमगाया 'ईद से हर इक मकाँहो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

चार-सू पुर-कैफ़ है मसहूर-कुनहर तरफ़ फैला है उल्फ़त का निशाँ

हो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

जगमगाया 'ईद से हर इक मकाँहो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

फ़ाक़ा-मस्ती में भी हैं ख़ुशियाँ बसीमुस्कुराया मुफ़्लिसी का आशियाँ

हो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

जगमगाया 'ईद से हर इक मकाँहो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

भूल कर रंजिश मिटाओ सब गुमाँजोड़ लें टूटे दिलों को यक ज़ुबाँ

हो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

जगमगाया 'ईद से हर इक मकाँहो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

रोज़-ओ-शब की बंदगी लाइ समरछा गया, फ़ानी ! सुकूँ का साएबाँ

हो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

जगमगाया 'ईद से हर इक मकाँहो मुबारक आप को, अहल-ए-ईमाँ !

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