नात लिरिक्स

Jab Kabhi Naat Hum Gungunane Lage

जब कभी नात हम गुनगुनाने लगे

नात ख़्वान: शमीम रज़ा फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जब कभी ना'त हम गुनगुनाने लगेबस हमें मुस्तफ़ा याद आने लगे

जब नबी के नवासे चले कर्बलाचाँद सूरज भी आँसू बहाने लगे

पाँव रक्खे हैं सरकार ने जिस जगहमेरी मिट्टी वहीं पर ठिकाने लगे

मेरे आक़ा ज़रूर उन के घर आएँगेजो दुरूदों से घर को सजाने लगे

रात काली थी लेकिन चमकने लगीमेरे सरकार जब मुस्कुराने लगे

याद-ए-तयबा ने बेचैन मुझ को कियाक़ाफ़िले जब मदीने को जाने लगे

अपनी उम्मत पे कैसे हुए मेहरबाँज़ख़्म खाए मगर मुस्कुराने लगे

जब कहीं कोई शेर-ए-रज़ा आ गयासारे नज्दी वहीं थरथराने लगे

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