नात लिरिक्स

Ik Rind Hai Aur Mid.hat-e-Sultaan-e-Madina

इक रिंद है और मिदहत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

नात ख़्वान: ज़ुफ़ैफ़ नदवीशायर: जिगर मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इक रिंद है और मिदहत-ए-सुल्तान-ए-मदीनाहाँ कोई नज़र, रहमत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

दामान-ए-नज़र तंग-ओ-फ़रावानी-ए-जल्वाए तल'अत-ए-हक़ ! तल'अत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

तू सुब्ह-ए-अज़ल, आईना-ए-हुस्न-ए-अज़ल भीए सल्ले 'अला सूरत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

ए ख़ाक-ए-मदीना ! तेरी गलियों के तसद्दुक़तू ख़ुल्द है, तू जन्नत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इक नंग-ए-ग़म-ए-'इश्क़ भी है मुंतज़िर-ए-दीदसदक़े तेरे, ए सूरत-ए-सुल्तान-ए-मदीना !

ज़ाहिर में ग़रीब-उल-ग़ुरबा फिर भी ये 'आलमशाहों से सिवा सतवत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इस तरह कि हर साँस हो मसरूफ़-ए-'इबादतदेखूँ मैं दर-ए-दौलत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

कौनैन का ग़म, याद-ए-ख़ुदा, दर्द-ए-शफ़ा'अतदौलत है यही दौलत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इस उम्मत-ए-'आसी से न मुँह फेर, ख़ुदाया !नाज़ुक है बहुत ग़ैरत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

ए जान-बल-ब आम्दा, हुशियार, ख़बरदारवो सामने हैं हज़रत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

कुछ और नहीं काम, जिगर ! मुझ को किसी सेकाफ़ी है बस इक निस्बत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

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