नात लिरिक्स

Huzoor Aisa Koi Intezam Ho Jaye | Salam Ke Liye Hazir Ghulam Ho Jaye

हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए | सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए

नात ख़्वान: सय्यिद सबीहुद्दीन सबीह रहमानीशायर: सय्यिद सबीहुद्दीन सबीह रहमानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हुज़ूर ! ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाएसलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए

मैं सिर्फ़ देख लूँ इक बार सुब्ह-ए-तयबा कोबला से फिर मेरी दुनिया में शाम हो जाए

तजल्लियात से भर लूँ मैं कासा-ए-दिल-ओ-जाँकभी जो उन की गली में क़याम हो जाए

हुज़ूर आप जो चाहें तो कुछ नहीं मुश्किलसिमट के फ़ासिला ये चंद-गाम हो जाए

हुज़ूर आप जो सुन लें तो बात बन जाएहुज़ूर आप जो कह दें तो काम हो जाए

मिले मुझे भी ज़बान-ए-बूसीरी-ओ-जामीमेरा कलाम भी मक़बूल-ए-'आम हो जाए

मज़ा तो जब है फ़रिश्ते ये क़ब्र में कह देंसबीह ! मिदहत-ए-ख़ैर-उल-अनाम हो जाए

नसीब वालो में मेरा भी नाम हो जाएजो ज़िंदगी की मदीने में शाम हो जाए

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