नात लिरिक्स

Huzoor Aap Ke Dar Ka Main Adna Gada Hun | Huzoor Aap Ke Tukdon Par Jee Raha Hun

हुज़ूर आप के दर का मैं अदना गदा हूँ | हुज़ूर आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँ

नात ख़्वान: सग़ीर अहमद नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हुज़ूर ! आप के दर का मैं अदना गदा हूँमेरे दम में, आक़ा ! ये दम आप का हैहुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

मैं सब से बुरा हूँ, मैं ये मानता हूँहुज़ूर ! आप का हूँ, यही जानता हूँबड़ा नाज़ है मुझ को मेरे मुस्तफ़ा पर'अता जो किया है भरम आप का है

हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

फ़लक़ है क्यूँ रौशन ज़रा ये तो सोचोज़माना है रौशन ज़रा ये तो समझोयहाँ पर भी, आक़ा ! क़दम आप का हैवहाँ पर भी आक़ा ! क़दम आप का है

हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

ये क़ुरआँ जो रब ने नाज़िल किया हैहुज़ूर ! आप का ही क़सीदा लिखा हैख़ुदा कह रहा है हबीब-ए-ख़ुदा सेये लोह भी तुम्हारी, क़लम आप का है

हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

उसे गर्दिशें अब मिटाएँगी कैसेहवाएँ उसे अब बुझाएँगी कैसेदिया बन के जलता है सीने में हर-दममेरे मुस्तफ़ा ! ये जो ग़म आप का है

हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

ज़ुबाँ पे ये जिस के ये हर-दम सदा होमदद अल-मदद, ऐ रसूल-ए-ख़ुदा ! होवोही जा रहा है ख़ुल्द-ए-बरीं कोकि थामा हुआ जिस ने 'अलम आप का है

हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

जहाँ पर फ़रिश्ते सलामी को आएँजहाँ पर हैं इंसान मे'राज पाएँछमा-छम जहाँ बरसे नूर ख़ुदा कामेरे मुस्तफ़ा ! वो हरम आप का है

हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

यही कब से, अहमद ! मेरी जुस्तुजू हैयही तो सदा से मेरी आरज़ू हैमेरी रूह निकले उसी रास्ते परजहाँ पर भी नक़्श-ए-क़दम आप का है

हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँमैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है

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