होगा एक जलसा हश्र में ऐसाजिस में सरकार की अज़मत पे ख़िताबत होगीसदरे-महशर हमारा रब होगाहज़रते-बुलबुले-सिदरा की नक़ाबत होगी
होगा सर मुस्तफ़ा का सजदे मेंजब परेशानी के आलम में ये उम्मत होगीरब कहेगा ये मेरा वादा हैउसको बख़्शूंगा तेरी जिस में मुहब्बत होगी
मैं पढूंगा हदाइक़े-बख़्शिशहश्र की भीड़ में गर मुझ को इजाज़त होगीसुन के नारा लगाएंगे सुन्नीऔर वहाबी के लिये दोहरी क़यामत होगी
ये वसीयत है एक आशिक़ कीकद की मिक़्दार में गहरी मेरी तुर्बत होगीउठ सकू मैं पए-अदब फ़ौरनजिस गड़ी क़बर में आक़ा की ज़ियारत होगी
आ'ला हज़रत वहाँ पे जाएंगेजिस जगह उनके ग़ुलामों को ज़रुरत होगीतू है एक रज़वी नातख्वां फ़ैज़ीइस लिये तेरे मुक़द्दर में भी जन्नत होगी
केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।