नात लिरिक्स

Hazaron Mein Bahattar Tan The Tasleem-o-Raza Wale

हज़ारों में बहत्तर तन थे तस्लीम-ओ-रज़ा वाले

नात ख़्वान: मौलाना मुहम्मद शफ़ी ओकाड़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हज़ारों में बहत्तर तन थे तस्लीम-ओ-रज़ा वालेहक़ीक़त में ख़ुदा इन का था और ये थे ख़ुदा वाले

ये ना'रा हुर का था जिस वक़्त फ़ौज-ए-शाम से निकलाकि देखो यूँ निकलते हैं जहन्नम से ख़ुदा वाले

किसी ने जब वतन पूछा तो यूँ हज़रत ने फ़रमायामदीने वाले कहलाते थे अब हैं कर्बला वाले

हुसैन इब्न-ए-'अली की क्या मदद कर सकता था कोईये ख़ुद मुश्किल-कुशा थे और थे मुश्किल-कुशा वाले

दवा-ए-दर्द-ए-'इस्याँ पंजतन के दर से मिलती हैज़माने में यही मशहूर हैं दारुश्शिफ़ा वाले

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