नात लिरिक्स

Hashr Mein Phir Milenge Mere Dosto

हश्र में फिर मिलेंगे मेरे दोस्तो

नात ख़्वान: मुज़फ़्फ़र रज़ा अरवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !बस यही है मक़ाम आख़री आख़रीहश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !बस यही है पयाम आख़री आख़री

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !

कहना सब जीते-जी के हैं शिकवे-गिलेआज से ख़त्म दुनिया के सब सिलसिलेशम'अ ढलने को है, दम निकलने को हैअब है क़िस्सा तमाम आख़री आख़री

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !

मुझ को नहला के पहना दिए हैं कफ़नरो चुके मिल के माँ-बाप भाई-बहनमौत भी, दोस्तो ! आज हैरत में हैहो चुका एहतिमाम आख़री आख़री

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !

ख़ुश्बुओं में कफ़न को बसाने लगेमेरी मय्यत को दुल्हन बनाने लगेदोस्तो ! अब उठाओ जनाज़ा मेराहो चुका इंतिज़ाम आख़री आख़री

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !

मुझ को ज़ेर-ए-ज़मीं लोग दफ़ना गएकिस-क़दर संग-दिल हो के फ़रमा गएदोस्तो ! चैन की नींद सोते रहोबस यही है मक़ाम आख़री आख़री

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !

कैसी दुनिया है, यारो ! ग़ज़ब रे ग़ज़बचंद दिनों में यहाँ भूल जाते हैं सबजिस बहाने मेरी याद आ जाए तोपढ़ना तुम ये कलाम आख़री आख़री

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !बस यही है मक़ाम आख़री आख़रीज़िंदगी ने जहाँ तक वफ़ा की रहीचल दिए अब सलाम आख़री आख़री

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो !

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