नात लिरिक्स

Har Zarra Mere Desh Ka Anmol Ratan Hai

हर ज़र्रा मेरे देश का अनमोल रतन है

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हर ज़र्रा मेरे देश का अनमोल रतन हैये अपना वतन प्यार-ओ-मोहब्बत का वतन है

ऐ ख़ाक-ए-वतन ! हम तुझे रुस्वा न करेंगेहम तेरे लिए जान की पर्वा न करेंगेमर जाएँगे लेकिन तेरा सौदा न करेंगेहै जान हथेली पे लिए सर पे कफ़न है

हर ज़र्रा मेरे देश का अनमोल रतन हैये अपना वतन प्यार-ओ-मोहब्बत का वतन है

जीते हैं सभी एक अलग शान से मिल कररहते हैं यहाँ हिन्दू मुसलमान से मिल करख़ुश होते हैं इंसाँ यहाँ इंसान से मिल करतहज़ीब के फूलों से मुज़य्यन ये चमन है

हर ज़र्रा मेरे देश का अनमोल रतन हैये अपना वतन प्यार-ओ-मोहब्बत का वतन है

ता-हद्द-ए-नज़र फैली हुई सब्ज़ रिदाएँपर्बत से ये गिरते हुए झरनों की सदाएँभाती है हमें हिन्द की पुर-कैफ़ फ़ज़ाएँकलियों के लबों पर भी तबस्सुम की किरन है

हर ज़र्रा मेरे देश का अनमोल रतन हैये अपना वतन प्यार-ओ-मोहब्बत का वतन है

नशीद-ख़्वाँ:अश्फ़ाक़ बहराइची

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।